कन्नौज: बजट में पूरी तरह खाली रही कन्नौज की झोली

कन्नौज: सकल उत्तरापथ नाथ सम्राट हर्षवर्धन का राजधानी नगर रहा कन्नौज ध्यानाकर्षण के अभाव में फ़क़ीर की तरह झोली फैलाये खड़ा रहा किंतु राज्य की योगी सरकार के 9वे बजट में उसकी झोली खाली की खाली ही रही। सम्राट हर्ष का इतिहास बताता है कि वे महाकुम्भ में अपने सम्पूर्ण राजकोष के साथ जाते थे और अपने शरीर के वस्त्र तक दान करके वापस कन्नौज लौटते  थे। कन्नौज का इतिहास रामायण काल से लेकर अंतिम हिंदू सम्राट जयचंद तक का गवाह रहा है। यहां के कई ऐतिहासिक स्थल आज संरक्षण के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। कुछ ऐतिहासिक स्थलों की जमीनें भू-माफियाओं के कब्जे में हैं।

स्थानीय लोगों ने कई बार इन धरोहरों के संरक्षण की मांग उठाई है। उन्होंने भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक से लेकर वर्तमान में तीनों विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों के समक्ष यह मुद्दा रखा है। सदर से विधायक और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री असीम अरुण, छिबरामऊ से विधायक अर्चना पांडेय और तिर्वा से विधायक कैलाश राजपूत से भी स्थानीय लोगों ने गुहार लगाई है।

असीम अरुण ने दिया था आश्वासन 

मंत्री असीम अरुण ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाने का आश्वासन दिया था। लोगों को उम्मीद थी कि यूपी सरकार के बजट में कन्नौज को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा होगी लेकिन गुरुवार को पेश हुए बजट में जिले के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई।

तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा

तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। असीम अरुण समाज कल्याण मंत्री भी हैं। इतना प्रभावशाली प्रतिनिधित्व होने के बावजूद कन्नौज की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की मांग अधूरी रह गई है।

कन्नौज में अधूरा पड़ा बाल संग्रहालय

कन्नौज में गैस एजेंसी रोड पर करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से बाल संग्रहालय का निर्माण कराया जा रहा था। भवन बनकर तैयार है, लेकिन भक्त के अभाव में फिनिशिंग का काम शुरू नहीं हो सका। जिस कारण करीब 7 वर्षों से बाल संग्रहालय का काम ठप पड़ा है। हालत ये है कि ये बिल्डिंग अब अराजकतत्वों का अड्डा बन चुकी है।

पुरातत्व संग्रहालय की भी दुर्दशा 

कन्नौज की धरोहरों को संरक्षित करने के लिए 8 वर्ष पहले पीएसएम डिग्री कॉलेज के पास

राजकीय पुरातत्व संग्रहालय का निर्माण कराया गया था। हालांकि पिछले 8 वर्षों में भाजपा सरकार इस म्यूजियम को विधिवत तरीके से चालू नहीं कर सकी। म्यूजियम में पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है। स्थानीय लोगों के प्रयास करने पर म्यूजियम अधूरी व्यवस्थाओं के बीच पब्लिक के लिए खोल तो दिया गया, लेकिन बजट के अभाव में अव्यवस्थाएं हावी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!